प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को 3200 करोड़ का सहारा, MP और राजस्थान को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत देशभर के किसानों को एक बार फिर राहत मिली है। केंद्र सरकार और बीमा कंपनियों ने हाल ही में कुल 3200 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम जारी किया है, जिससे लाखों किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है।

MP और राजस्थान को सबसे ज्यादा फायदा

जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस भुगतान में सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों को मिला है।

  • मध्य प्रदेश: लगभग 1100 करोड़ रुपये

  • राजस्थान: करीब 950 करोड़ रुपये

इन दोनों राज्यों में खरीफ सीजन में सूखा, अधिक वर्षा और कीट-रोगों के प्रकोप के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। बीमा क्लेम ने किसानों को अगले सीजन की तैयारी के लिए आर्थिक मजबूती दी है।

केंद्र सरकार का बयान

कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान की भरपाई के लिए त्वरित और पारदर्शी आर्थिक सहायता देना है। अब ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट डेटा और मोबाइल ऐप के जरिए नुकसान का आकलन तेजी से किया जा रहा है, ताकि भुगतान में देरी न हो।

किसानों की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के किसान महेश पटेल कहते हैं, "पिछले साल बारिश ने धान और सोयाबीन की फसल बर्बाद कर दी थी। बीमा क्लेम मिलने से अब रबी फसल की बुआई आसानी से हो पाएगी।"
राजस्थान के कोटा जिले की कमला देवी ने कहा, "अगर यह पैसा समय पर न मिलता, तो हमें खेती छोड़नी पड़ सकती थी।"

योजना का महत्व

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016 से लागू है और अब तक करोड़ों किसानों को इसका लाभ मिल चुका है। योजना के तहत:

  • खरीफ फसलों पर अधिकतम 2% प्रीमियम

  • रबी फसलों पर अधिकतम 1.5% प्रीमियम

  • बागवानी/वाणिज्यिक फसलों पर अधिकतम 5% प्रीमियम
    बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं।

भविष्य की दिशा

सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक और रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग के जरिए आने वाले समय में क्लेम भुगतान और तेज होगा। लक्ष्य है कि किसान को फसल नुकसान के 2–3 हफ्तों के भीतर बीमा राशि मिल जाए।

निष्कर्ष

3200 करोड़ रुपये के इस ताजा भुगतान ने किसानों को न केवल मौजूदा संकट से उबारा है, बल्कि अगले सीजन के लिए उम्मीद और विश्वास भी दिया है। खासतौर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में, यह राशि कृषि अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने का काम करेगी।

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